Hindi Saptah Diwas 3

Category : Activity | Sub Category : Activity Posted on 2021-09-11 13:56:22


Hindi Saptah Diwas 3

  “काव्य”कवि के आकुल अंतर से उद्भूत वह पुष्प होता है जो युग –युगांतर तक अपनी महक से सहृदयों को आह्लादित करता रहता है !

 ऐसे ही थे छायावादी कवि जिनकी रचनाएँ आज भी हमारे ह्रदय को सराबोर कर देती हैं| छायावादी कवि सौंदर्यानुभूति से अभिभूत है।यह युग अपने आंतरिक सौंदर्य का उद्घाटन प्रकृति के माध्यम से करता हुआ दिखाई पड़ता है-

शशि मुख पर घूंघट डाले,अंचल में दीप छिपाए

जीवन की गोधूलि में,कौतूहल से तुम आए...जयशंकरप्रसाद जी

एक शाम छायावादी कवियों के नाम जितना हमें कहने में अच्छा लगता है उतना ही आज की गतिविधि द्वारा बच्चों की प्रस्तुति ने इस बात को सच कर दिया गया कि हमारे जो छायावादी कवि है वह भारत के स्तंभ हैं |उन्हीं स्तंभों के रूप में आज कक्षा S1, S2और S3के सभी विद्यार्थियों ने अपने-अपने पसंदीदा कवियों के विषय में कविताएं, लेख, उपन्यास  इत्यादि की अलग –अलग झलकियाँ प्रस्तुत की जिन्हें सुनकर ऐसा लगा मानो शाम को ही छायावादी छाया पड़ने से भारतीय साहित्य को और अधिक आगे ले जाने में विद्यार्थियों का पूरा सहयोग  भविष्य में मिलने वाला हैl आशा है कि इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से भारतीय साहित्य जरूर आगे बढ़ेगा|

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